आँखों की देखभाल

आँख आने का इलाज, कारण और लक्षण

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बारिश के मौसम में सबसे खतरनाक संक्रमणों में से एक है कंजक्टिवाइटिस, जिससे आपके आंखों के संक्रमण का खतरा सबसे अधिक बढ़ जाता है। जब आंखों में कंजक्टिरवाइटिस अपना बसेरा जमा लेता है तब आपको ऐसा लगेगा जैसे आंखों में कुछ रेत की तरह चुभ रहा है। ऐसे में आंखों में दर्द के साथ जलन भी होना बहुत आम है।

बता दें कि कंजक्टि वाइटिस की यह बीमारी आपको 7 दिन तक बेचैन कर के रखती है, क्योंकि इस बीमारी का कीटाणु अपनी उम्र पूरी करके ही खत्म होता है। हालांकि, दर्द निवारक गोलियों और एंटिबायोटिक आई ड्रॉप से भी कंजक्टिवाइटिस में राहत मिल सकती है।

बता दें कि यह बीमारी बैक्टीरिया, वायरस और ऐसे पदार्थों की एलर्जी से होती है जो आपके आंखों में जलन पैदा करते हैं। यही नहीं, यह सर्दी-जुकाम के लिए जिम्मेदार वायरस के कारण भी हो सकती है। ध्यान रहे कि इसमें कान का संक्रमण, सायनस का संक्रमण तथा गले की खराश के लिए जिम्मेदार वायरस भी शामिल हैं। धूल, धूप और धुएं से खुद को बहुत ही दूर रखें क्योंकि इन सभी से कंजक्टिवाइटिस भड़क सकता है।

अगर आप यह सोचते हैं कि कंजक्टिवाइटिस के लक्षण हर व्यक्ति में एक समान रहते हैं तो आप गलत हैं, क्योंकि लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। यूं तो आम लक्षण है आंखों में जलन और रेत कणों के अंदर होने का एहसास होना। वहीं, अंदरूनी पलकें और आंखों की किनारें तक लाल सुर्ख हो जाती हैं और आंखों से लगातार पानी गिरते रहता है। जब आप सुबह सोकर उठते हैं तब आपकी दोनों पलकें आपस में चिपकी हुई भी पायी जा सकती हैं। यह नहीं, कई लोगों की आंखें तो सूज जाती हैं और वह तेज रोशनी के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।

कैसे फैलती है कंजक्टिीवाइटिस
यह आपसी संपर्क के कारण बड़ी तेज़ी से फैलती है। इस रोग का वायरस संक्रमित मरीज के उपयोग की किसी भी वस्तु जैसे रूमाल, तौलिया, टॉयलेट की टोंटी, दरवाजे का हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर से दूसरों तक पहुंचता है। जान लें कि कम्प्यूटर का की-बोर्ड भी इसे फैलाने में सबसे बड़ा सहायक साबित होता है।

ऐसे रखें ख्याल
अच्छे आंख के डॉक्टर से चेकअप कराए। बर्फ की सिंकाई और दर्द निवारक से भी कंजक्टिवाइटिस की जलन में राहत मिलती है। ऐसे मरीजों को अपनी आंखों की किनोरों को हल्के गुनगुने पानी में भिगोए हुए रुई के फाहों से साफ करते रहना चाहिए, इससे पलकों को राहत मिलती है और वह चिपकती भी नहीं। संक्रमित होने पर नियमित रूप से धूप का चश्मा पहनकर रहना सबसे ज्यादा अकलमंदी है।

क्या हो सकती है हानि
कंजक्टिवाइटिस का वायरस गंभीर नुकसान नहीं पहुंचाता। अगर किसी मरीज की आंखों में अधिक कीचड़ आता है तो उसे नेत्ररोग विशेषज्ञ की सलाह लेना चाहिए। कई प्रजाति के वायरसों से कार्निया पर धब्बे हो जाते हैं। ये धब्बे समय के साथ निकल भी जाते हैं।

इस बात पर दें ध्यान
किसी भी दवा के दुकान में जाकर कोई भी दवा या ड्रॉप ना खरीदें। इनमें तेज स्टेरायड्स भी हो सकते हैं, जिनसे कोर्निया में गंभीर संक्रमण भी हो सकता है। इससे कोर्निया मंे अल्सर भी हो सकता है। जितना हो सके अपनी आंखों को मसलें या रगड़ें नहीं। जिनको कंजक्टिीवाइटिस हो रखी है उनके पर्सनल तौलिया, रूमाल, धूप का चश्मा वगैरह का इस्तेमाल करने से बचें।

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