योग मुद्रा

सीत्कारी प्राणायाम की विधि और फायदे

Sitkari pranayama steps and benefits in hindi.

सीत्कारी प्राणायाम की विधि और फायदे

हम नहाते समय अपने बाहरी अंगों को अच्छी तरह से साफ करने की कोशिश करते हैं लेकिन कभी आपने सोचा है कि बाहरी अंगों की तरह हमारे शरीर के भीतरी अंग भी मैले होते हैं जिसे साफ करना बहुत ही जरूरी होता है। अच्छी बात यह है कि आप इसे योग अभ्यास के जरिए साफ कर सकते हैं। कई लोग बाहरी रूप से स्वस्थ्य रहने का दिखावा करते हैं, लेकिन आंतरिक रूप से वह कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से ग्रसित होते हैं। जैसे कि पेट में जलन, शरीर में ऑक्सीजन की कमी का होना, शारीरिक तेज में कमी और शरीर का भीतरी अंग साफ न होना। ऐसे में आप सीत्कारी प्रणायाम कर सकते हैं। यह कुछ हद तक शीतली प्राणायाम से मिलता जुलता है।
ऐसा माना गया है कि इस प्राणायाम को करते समय ‘सीत्‌ सीत्‌’ की आवाज निकलती है। इसलिए लोगों ने इसे सीत्कारी कुम्भक या प्राणायाम का नाम दिया है। यह गर्मियों का एक बेहतरीन प्राणायाम है।

सीत्कारी प्राणायाम करने की विधि
सीत्कारी प्राणायाम को करने के लिए सबसे पहले साफ जगह देखकर चटाई बिछाइए। इसके बाद सिद्धासन की मुद्रा में बैठ जाएं। अपनी कमर, सिर और गले को सीधी रखिए। इसके बाद नीचे के दांतों को ऊपर के जबड़े के दांतों पर रख दें। जीभ को मुंह के भीतर पीछे की ओर इस विधि से मोड़िए कि उसके अग्र भाग का स्पर्श ऊपरी तालु से हो। दांतों की पंक्तियों को एक-दूसरे पर रखिए और होंठों को अधिक से अधिक फैलाइए। इस ‍क्रिया को अपनी क्षमता के अनुसार 10 से 15 बार तक करने का प्रयास करें।

सीत्कारी प्राणायाम करने के लाभ
1. इस प्राणायाम के करने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी दूर होती है। 2. इससे न केवल आपके शारीरिक तेज में वृद्धि होती है बल्कि आपका पूरा शरीर अंदर ठड़ा होता है।
3. इससे पेट की जलन की समस्या दूर होती है।
4. आपके चेहरे की चमक को बढ़ाने में यह प्राणायाम बहुत ही लाभदायक है।
5. आप पूरे दिन उर्जावान महसूस करते हैं और आपको भूख-प्यास, और नींद आपको नहीं सताते।
6. यह प्राणायाम शरीर की भीतरी अंगों की भी सफाई करता है।
7. यह तनाव, क्रोध और अवसाद जैसी समस्याओं को कम कर देता है। साथ ही इस प्राणायाम के करने से उच्च रक्तचाप भी कंट्रोल में रहता है।

सावधानी
1. जब ज्यादा सर्दी हो तो इस प्राणायाम को न करें।
2. अस्थमा, सर्दी और खांसी की बीमारी में इस प्राणायाम को न करें
3. मुंह में कफ व टॉन्सिल के रोगियों को सीत्कारी प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए।

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