योग मुद्रा

उड्डीयान बंध करने की विधि और लाभ

Udiyan bandh steps and health benefits in hindi.

उड्डीयान बंध करने की विधि और लाभ

जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ने लगती है, वैसे-वैसे हमारी त्वचा ढीली होने लगती है और साथ ही हमारा पेट बढ़ने लगता है। हमारे शरीर की जिन नदियों में रक्त बहता है, वो भी कमजोर हो जाता है। ऐसी समस्या से हर किसी को गुजरना पड़ता है, लेकिन जब हम उड्डियान बंध को करते हैं, तो इससे हमारी बढ़ती हुई आयु पर असर होता है। इसको करने से व्यक्ति अपने आप को तरोताजा और युवा महसूस करता है। इस बंध के कारण हमारी आँख, कान, नाक और मुंह अर्थात हमारे सातों द्वार बंद हो जाते हैं। जिसके फलस्वरूप प्राण सुषुम्ना में प्रविष्ट होकर ऊपर की ओर उड़ान भरने लगते हैं। यही कारण है कि हम इसे उड्डीयान बंध कहते हैं, उड्डीयान बंध, बंध योग का ही एक प्रकार है ।

उड्डीयान बंध को दो तरीको को साथ किया जाता है जो इस प्रकार से हैं…
1. खड़े होकर उड्डीयान बंध
2. बैठकर उड्डीयान बंध

उड्डीयान बंध करने की विधि

खड़े होकर करने की विधि

  1.  सबसे पहले अपने दोनों पाँव केवल बीच में अंतर रखते हुए अपने दोनों घुटनों को मोड़कर थोड़ा सा आगे की तरफ झुका लें।
  2. अब अपने दोनों हाथों को जांघो के ऊपर रखें और वपने मुंह से हवा को बाहर निकालकर नाभि को अंदर की ओर खींचते हुए अपने सातों छिद्रों को बंद करने का प्रयास करें। यह आप का उड्डियान बंध होता है।
  3. अपने श्वास को बाहर निकालकर 20 से 30 सेंकड तक बाह्य कुंभक करें।

बैठकर करने की विधि

  1. सबसे पहले दरी या कंबल एक समतल जगह पर बिछा लें |
  2. फिर सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं।
  3. अपने हाथों की हथेलियों को घुटनों पर रखें और थोड़ा सा आगे की और झुकते हुए पेट के स्नानुओं को अंदर की और खींचते हुए रेचक करें अर्थात अपनी सांस को बाहर की और निकालें।
  4. अब अपनी सांस को धीरे-धीरे अंदर की और लेते हुए अपनी पसलियों को ऊपर की और उठाएं।
  5. अपनी सांस को छाती में ही रोक कर रखें एंव अपने पेट को ढीला छोड़ दे।
  6. अपने पेट को अंदर की ओर जितना हो सके उतना सिकोड़ लें ।

इस बंध को खाली पेट करना चाहिए। शुरुआत में इसे तीन बार करना चाहिए, बाद में अधिक समय तक किया जा सकता है।

उड्डियान बंध करने के लाभ

  1. इसका नियमित अभ्यास करने से आमाशय, लिवर व गुर्दे सक्रिय होकर सही तरीके के साथ काम करने लगते हैं। इसके साथ इन अंगों से संबंधित जो भी रोग होते है वो दूर हो जाते हैं।
  2. यह बंध से पेट, पेडू और कमर की मांसपेशियां सक्रिय होकर शक्तिशाली बनता है और इसके साथ हमारी पाचन शक्ति बढ़ती है। इसके साथ ही हमारे पेट और कमर की चर्बी कम होती है।
  3. इसके नियमित अभ्यास से हमारी उम्र के बढ़ने का असर कम हो जाता है। इसको करने वाला व्यक्ति हमेशा युवा बना रहता है।

उड्डियान बंध – सावधानियां

  • सुबह के समय में अपने दैनिक नित्यक्रम करने के बाद करना चाहिए और इसे हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए।
  • गर्भवती महिलाओँ, ह्रदय रोगियों और पेट में किसी तरह के रोग होने वाले व्यक्ति को इस का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • इसको करने हुए जब भी आप को किसी तरह की परेशानी हो रही हो तो आप को इसे नहीं करना चाहिए।

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