आँखों की देखभाल

आंखों की बीमारियां

Main eye diseases in hindi.

जब किसी व्यक्ति को कोई वस्तु वास्तविक रूप से सही या सीधी नहीं दिखाई देती और वही वस्तु उसे टेढ़ी, मुड़ी हुई या फिर लहराती हुई नजर आती है, तो इस स्थिति को दृष्टि का विकारग्रस्त हो जाना कहते हैं। आम तौर पर यह स्थिति रेटिना में आए विकार (डिफेक्ट) के कारण पैदा होती है। आइए जानते हैं, दृष्टि में विकार की वजह बनने वाली आँखों की कुछ बीमारियों के बारे में…

एज रिलेटेड मैक्युलर डिजेनरेशन
जब हमारी उम्र बढने लगती है, तो बढती उम्र के साथ-साथ हमारी असामान्य रक्त कोशिकाएं हमारी आँखों के कमजोर क्षेत्र में विकसित होने लगती है। यही कारण है कि हमारी दृष्टि खराब होने लगती है। मेडिकल भाषा में इस स्थिति को एज रिलेटेड मैक्युलर डिजेनरेशन (एएमडी) कहते हैं।

डायबिटीज मैक्यूलर एडिमा
इन्सुलिन पर निर्भर टाइप 1 डायबिटीज (मधुमेह) वालों इन्सुलिन न लेने वाले डायबिटीज टाइप 2 वाले लोंगो में डायबिटीक मैक्यूलर एडिमा नामक समस्या के विकसित होने का खतरा होता है। जो लोग डायबिटीज के शिकार होते हैं, उन्हें अपनी आँखों का समय-समय पर चेकअप करवाते रहना चाहिए। उन्हें चाहिए कि वो अपनी शुगर की भी जांच करवाएं।

रेटिना वैस्कुलरओक्लुजन
यह स्थिति तब पैदा होती है, जब आँख के पीछे मौजूद एक नस में रुकावट से रक्त संचार से बाधा पहुंचती है। जिसके कारण हमारी दृष्टि में विकार उत्पन हो जाता है और हमारी आँखों के आगे धुंधलापन छा जाता है।

एस्टीगमैटिज्म
कार्निया की गोली में आने वाले फर्क को एस्टीगमैटिज्म कहा जाता है। कार्निया आँख की आईरिस (आख में देखने वाले भूरे रंग का भाग) और प्यूपिल को ढकती है। कार्निया हमारी आँख के लेंस की शेप का एक आधार होती है। आम तौर पर कार्निया और लेंस चिकने और समान गोलाए के होते हैं ताकि वे आने वाली किरणों को सही रूप से आँख के भीतर पहुचा सकें। अगर कार्निया या लेंस चिकने या फिर सही गिलाई में नहीं है, तो आप को दिखने में दिक्कत पैदा हो सकती है।

कंजंकिटवाइटिस
कंजंकिटवाइटिस नेत्रों की सूजन की स्थिति की ओर इशारा करती है। कन्जंकिटवा एक पतला सा कवच होता है, जो पलकों के अंदर और आँख के सफ़ेद हिस्से (श्वेत पटल) को कवर करता है। अक्सर इस स्थिति में आँख को गुलाबी आँख या फिर पिंक आँख कहते हैं। कन्जंकिटवा में छोटी सी रक्त वाहिकाएं भी शामिल होती है, जो हमारी आँखों को नम रखती है, कन्जंकिटवा में जलन या सूजन होने पर रक्त वाहिकाओं में रक्त एकत्र होने लगता है और हमारी पलके लाल होने लगती है। इसके लक्षण एक या दोनों आँखों में देखें जा सकते हैं। इसके अलावा विकारग्रस्त दृष्टि की समस्या, केरोटाकोंस, मैक्युलर होल नामक अन्य नेत्र विकारों की वजह से भी उत्पन्न हो सकती है।

आंखों को ऐसे बेहतर बनाएं
1. बचाव इलाज से बेहतर है, लेकिन अगर आप दृष्टि के विकारों से ग्रस्त हैं, तो आधुनिक मेडिकल साइंस आपके लिए स्थायी इलाज उपलब्ध करती है। उपचार के प्रकार और कारणों के अनुसार अलग- अलग होते हैं। 2. आँखों पर पड़ने वाले दबाव स्ट्रेस या तनाव को रोकने के लिए नियमित रूप से आँखों का व्यायाम करें।

3. आहार में विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई से युक्त खानपान को वरीयता देने से अच्छी दृष्टि बरकरार रहती है। विटामिन ए टमाटर, पालक और फलों में पाया जाता है, इसी तरह विटामिन सी नीबूं और खट्टे फलों में पाया जाता है।

4. घर से बाहर निकलने से पहले चश्मा पहनें ताकि आप यूवी किरणों से अपनी आँखों को बचा सकें।

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