सुखासन की विधि और लाभ

सुखासन का शाब्दिक अर्थ होता है सुख देने वाला आसन। जब भी हम इस आसन को करते हैं, तो सच में ही हमें आत्मीय शांति और सुख की प्राप्ति होती है, यही कारण है कि हम इस आसन को सुखासन के नाम से जानते हैं। सुखासन बैठकर या फिर इसे पलथी मार कर किया जाने वाला आसन होता है, लेकिन आज समय कुछ ऐसा है कि हमारे पास पलथी मारकर बैठने का समय नहीं है। प्राचीन समय में लोग पलथी मारकर खाना खाते थे। लेकिन अब समय कुछ ऐसा है जिसमें लोग नीचे बैठकर खाना नहीं खाते बल्कि डायनिग टेवल पर बैठकर ही खाना खाते हैं। आज के समय में व्यक्ति जितना सुखी है, उतना ही वह बीमारियों से ग्रसित है, लेकिन जब हम आसन करते हैं तब हमारे शरीर को होने वाली बीमारियों से काफी हद तक बच सकते हैं।

सुखासन की विधि ( Sukhasana Steps ) :
सुखासन अर्थात सुख देने वाला आसन। आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई तनाव से ग्रस्त है, जिसके कारण उसका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है, ऐसे में जब हम मन की शांति चाहते हैं तो सुखासन इसके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित होता है सुखासन को किस प्रकार से किया जाता है इस बारे में बात करते हैं…

सुखासन करने के लाभ ( Sukhasana Benefits ) :

सुखासन सावधानियां ( Sukhasana Precautions )