मैग्नीशियम की कमी के लक्षण

मैग्नीशियम की कमी, जिसे हाइपोमैग्नेशिमिया के रूप में भी जाना जाता है, जिसे अक्सर लोग अनदेखा कर देते हैं। मैग्नीशियम की कमी के लक्षण और कारण अलग-अलग हैं। यदि शरीर में मैग्नीशियम की कमी है तो इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं जैसे मधुमेह, पुरानी दस्त, सेलेक रोग और हंगरी बोन सिंड्रोम शामिल हैं। आइए जानते हैं कि क्या है इसके लक्षण।

मांसपेशियों में ऐंठन और नसों में खिंचाव

मांसपेशी ऐंठन मैग्नीशियम की कमी के लक्षण हैं। मसल्स का बढ़ना, सिकुड़ना और उन्हें आराम देने को नियंत्रित करता है। मैग्नीशियम की कमी से आपको पैरों की नसों में खिंचाव और मुड़ने की समस्या हो सकती है।

सबसे बुरी स्थिति परिस्थितियों में, कमी से दौरे भी हो सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये लक्षण तंत्रिका कोशिकाओं में कैल्शियम के अधिक प्रवाह के कारण होते हैं, जो मांसपेशी नसों को अतिसंवेदनशील करता है। यदि लगातार लक्षण बना रहे हैं तो आपको अपने डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

मानसिक विकार

मानसिक विकार मैग्नीशियम की कमी का एक और संभावित परिणाम हैं। इसमें व्यक्ति की उदासीनता शामिल है, जो मानसिक संयम या भावना की कमी से संबंधित है।

वैज्ञानिकों ने यह भी अनुमान लगाया है कि मैग्नीशियम की कमी चिंता को बढ़ावा दे सकती है, लेकिन इसमें प्रत्यक्ष साक्ष्य की कमी है। इसके अलावा कुछ अध्ययनों ने अवसाद के बढ़ते जोखिम के साथ कम मैग्नीशियम स्तर को जोड़ा है।

ऑस्टियोपोरोसिस

ऑस्टियोपोरोसिस एक विकार है जिसका संबंध कमजोर हड्डी और हड्डी के फ्रैक्चर से है। ऑस्टियोपोरोसिस कई कारणों से होता है जैसे; बुढ़ापा, व्यायाम की कमी और विटामिन डी और विटामिन के का कम सेवन आदि।

दिलचस्प बात यह है कि मैग्नीशियम की कमी भी ओस्टियोपोरोसिस रोग का कारण बन साता है। इसकी कमी से हड्डियां सीधे तौर पर कमजोर होती हैं।

थकान और मांसपेशी कमजोरी

थकान, शारीरिक या मानसिक थकावट मैग्नीशियम की कमी का एक और लक्षण है। मैग्नीशियम की कमी से आपको उर्जा की कमी महसूस होगी। आपको आराम करने के बाद भी थकावट लगती रहेगी।  ध्यान रखें कि समय-समय पर हर कोई थक जाता है। आमतौर पर, इसका मतलब है कि आपको आराम करने की आवश्यकता है।

हालांकि, गंभीर या लगातार थकान स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकती है। चूंकि थकान एक गैर विशिष्ट (non-specific) लक्षण है, इसलिए इसका कारण पहचानना असंभव है जब तक कि यह अन्य लक्षणों के साथ न हो। मैग्नीशियम की कमी का एक और संकेत मांसपेशी कमजोरी है, जिसे मायस्थेनिया भी कहा जाता है। – थकान को दूर करने के लिए विटामिन

बार-बार सिरदर्द होना

मैग्नीशियम की कमी से सिरदर्द की समस्या भी हो सकती है। दरअसल मैग्नीशियम की कमी से आपके शरीर में सेरोटोनिन का बनना कम हो जाता है। इससे मस्तिष्क को सही मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता।

उच्च रक्त चाप

साक्ष्य बताते हैं कि मैग्नीशियम की कमी रक्तचाप बढ़ा सकती है। पशु अध्ययन से पता चलता है कि मैग्नीशियम की कमी रक्तचाप में वृद्धि कर सकती है और उच्च रक्तचाप को बढ़ावा दे सकती है, जो हृदय रोग का एक जोखिम कारक है।

कई समीक्षाओं ने निष्कर्ष निकाला है कि मैग्नीशियम सप्लीमेंट रक्तचाप को कम कर सकती है, खासकर उच्च रक्तचाप वाले वयस्कों में। – उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने के 10 आसान टिप्स

अस्थमा

कभी-कभी गंभीर अस्थमा वाले मरीजों में मैग्नीशियम की कमी देखी जाती है। इसके अतिरिक्त, स्वस्थ लोगों की तुलना में अस्थमा वाले व्यक्तियों में मैग्नीशियम का स्तर कम होता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मैग्नीशियम की कमी फेफड़ों के वायुमार्गों को प्रभावित कर सकता है। इसके कारण सांस लेने में मुश्किल हो सकती है।

मैग्नीशियम की कमी के सबसे गंभीर लक्षणों में से हार्ट एरिथमिया या अनियमित दिल की धड़कन है। अधिकांश मामलों में एरिथिमिया के लक्षण हल्के होते हैं। अक्सर, इसमें कोई लक्षण नहीं होता। एरिथिमिया के संभावित लक्षणों में हल्कापन, सांस की तकलीफ, सीने में दर्द शामिल है। एरिथमिया के मामले में स्ट्रोक या दिल की विफलता का खतरा बढ़ सकता है।

नींद की कमी

नींद आपके शारीरिक स्वास्थ्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उदाहरण के लिए, नींद आपके दिल और रक्त वाहिकाओं की हीलिंग और रिपेयर का काम करता है।

आपको बता दें कि मैग्नीशियम की कमी से आपको कम नींद आने लगती है। मैग्नीशियम की कमी से तनाव हो सकता है, दिल की धड़कने बढ़ सकती है और आपको सोने में मुश्किल आ सकती है।

मैग्नीशियम की कमी से पाचन शक्ति पर असर

सिर्फ आपकी डाइट में फायबर की कमी नहीं बल्कि मैग्नीशियम की कमी से आपकी पाचन शक्ति बिगाड़ सकती है। आपको इस बात पर भरोसा तब होगा जब आपको पता चलेगा कि हाजमे की अधिकतर दवाओं में मैग्नीशियम होता है।

इसके अलावा मैग्नीशियम की कमी आपको ज्यादा ही सेंसिटिव बना देती है। कम मैग्नीशियम के कारण आपका नर्वस सिस्टम कमजोर हो जाता है और आप अधिक सेंसिटिव हो जाते हैं।