डेंगू बीमारियां

डेंगू में क्या खाना चाहिए – घरेलू उपचार

What should eat in dengue fever in hindi.

डेंगू के लक्षण और उपचार - Dengue Symptoms and home remedies in hindi

हर साल अगस्त और सितंबर महीने में डेंगू जैसे मच्छर जनित बीमारियां अपना कहर बरपाती हैं। एक तरफ जहां इस बीमारी के आगे लोग मजबूर होते हैं वहीं प्रशासन इस बीमारी के आगे उदासीन दिखाई देती है। इन सबके बावजूद भी लोगों देसी डेंगू बीमारी में खूद को राहत पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं डेंगू बीमारी से राहत पाने के लिए किन-किन चीजों का सेवन करना चाहिए।

डेंगू में क्या खाना चाहिए – घरेलू उपचार

डेंगू में दलिया खाएं

डेंगू में दलिया खाएं

दलिया एक सुपाच्य भोज्य पदार्थ है। यदि आप शरीर के कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करना चाहते हैं, ह्र्दय के कार्यो में सुधार लाना चाहते हैं और बॉडी के मेटाबोल्जिम को फिट रखना चाहते हैं तो रोजाना भरपूर मात्रा में दलिया का सेवन कीजिए। इसके अलावा डेंगू रोगी के लिए भी सबसे अच्छा आहार है दलिया। इसे आसानी से खाया जा सकता है तथा इससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है।

सूप

ढेर सारी पौष्टिक सब्ज़ियों से बने इस टेस्टी और हेल्दी सूप को हर कोई पसंद करता है। कई बीमारियों सूप बहुत ही फायदेमंद है। इससे प्रतिरक्षा तंत्र और उर्जा का स्तर तो बढ़ता ही है, साथ ही डेंगू जैसी भयंकर बीमारी में भी बहुत लाभदायक है। आपको बता दें डेंगू से हड्डियों में काफी ज्यांदा दर्द होता है, जिसके लिए सूप पीने से आराम मिल सकता है।

नारियल पानी

नारियल पानी

बाहर से सख़्त और अंदर से सफ़ेद-मुलायम नारियल अपने स्वाद के साथ-साथ कुछ गुणों के लिये भी मशहूर है। नारियल में विटामिन, फाइबर, कैल्शियम और खनिज तत्व पाये जाते हैं। पेट तथा डेंगी जैसी बीमारियों में भी इसका पानी राहत दिलाता है। इसमें मौजूद एलेक्ट्रो लाइट्स, मिनरल और अन्यत जरुरी पोषक तत्वे डेंगू बुखार से तड़प रहे रोगियों को राहत देता है। इस दौरान देखा गया है कि नारियल पानी भी महंगा हो जाता है।

संतरा

डॉक्टरों के मुताबिक डेंगू बीमारी में खूब सारे संतरे या उसका जूस पीना चाहिए। यह स्वास्थ्यवर्धक फल खनिज एवं विटामिन के जरिए शरीर में उर्जा प्रदान करता है। इससे न केवल पेट की समस्या दूर होती है बल्कि चुस्ती-फुर्ती और भूख भी बढ़ती है। यह रोगी हजम शक्ति को उन्नत करने के साथ-साथ एन्टीबॉडी को कार्यकारी बनाने में मदद करता है।

नींबू जूस

डेंगू बुखार में विटामिन-सी से भरपूर नींबू जूस को अच्छा माना जाता है। दरअसल शरीर में मौजूद वायरस और विषैले तत्वों को बाहर निकालने के लिए नींबू का रस पीना चाहिए।

डेंगू के मरीजों के लिए पपीता है फायदेमंद

डेंगू के मरीजों के लिए पपीता है फायदेमंद

पपीता सभी फलों के सबसे पसंदीदा फल नहीं हो सकता है, लेकिन इसमें कई स्वास्थ्य गुण है इस बात से इनकार नहीं किया सकता है। पपीता में पापीन नामक एक एंजाइम होता है जो पाचन के लिए सही होता है। पपीता में फाइबर और पानी की मात्रा भी अधिक होती है, दोनों ही कब्ज को रोकने में मदद करते हैं और नियमितता और स्वस्थ पाचन तंत्र को बढ़ावा देते हैं।

पपीता न केवल पाचन शक्ति को मजबूत बनाता है बल्कि दांत दर्द से राहत, नियमित माहवारी, मजबूत प्रतिरक्षा, वजन घटाने और त्वचा की देखभाल में भी मदद करता है। इन सबके अलावा पपीता में कई औषधीय गुण हैं। अध्ययन से पता चलता है कि पपीता बीज एडीज मच्छर के लिए विषाक्त है। अन्य अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकला है कि पपीता डेंगू रोगियों में तेज प्लेटलेट का उत्पादन करता है।

पौष्टिक तत्वों से भरपूर पपीता में कई सारे औषधीय गुण होते हैं। जब डेंगू का कहर अपने चरम पर होता है तब लोग पपीते के पत्तों के रस पर ज्यादा भरोसा करते हैं। यह एक देशी उपचार है। रोगी को दिन में दो बार 2-3 चम्महच पपीते के पत्तेच का रस पिलाना चाहिये।

हर्बल टी पीजिए

जिन्होंने तेज बुखार है वे हर्बल टी पी कर आराम पा सकते हैं। डेंगू बुखार होने पर अदरक और इलायची डालकर हर्बल टी बनाई जा सकती है इससे मरीज को बहुत राहत मिलेगी।

फल का रस

स्ट्रॉरबेरी, अमरूद, कीवि, संतरा और पपीता ये कुछ ऐसे भल हैं जिसे डेंगू बुखार में जरूर पीना चाहिए। इससे शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाया जा सकता है। यह बैक्टीसरिया और वायरस को भी मार भगाता है।

डेंगू में पीजिए सब्जियों का रस

डेंगू में पीजिए सब्जियों का रस

सब्जी के रस के लाभ में त्वचा और बालों के स्वास्थ्य का समर्थन शामिल है। इसके अन्य फायदों में पोषक तत्वों से भरपूर, रक्त परिसंचरण में वृद्धि करना और शरीर की गंदगी को बाहर निकालना आदि शामिल है।
आप डेंगू के लक्षणों के इलाज के लिए सब्जियों के जूस का सेवन कर सकते हैं। डेंगू के लक्षणों के इलाज के लिए गाजर, ककड़ी और अन्य पत्तेदार जड़ी-बूटियां विशेष रूप से अच्छे हैं। इन सब्जियां आवश्यक विटामिन और खनिजों से परिपूर्ण हैं जो बीमारी में प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद करते हैं और रोगी की पीड़ा को कम करते हैं।

 

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