डिप्रेशन

कैसे जानें कि मुझे डिप्रेशन है

हाल के सालों में आप लोगों से डिप्रेशन बीमारी के बारे में जरूर सुनते होंगे। मीडिया में भी डॉक्टर और साइकोलॉजिस्ट इस बीमारी के बारे में जरूर बात करते हैं। डिप्रेशन बीमारी धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ा रही है। बच्चे से लेकर युवा और बुजुर्ग, हर उम्र के लोगों में यह बीमारी बढ़ती जा रही है। हालांकि समस्या यह है कि भारत में लोग इसे बीमारी नहीं मानते, जबकि यह बहुत बड़ी मानसिक बीमारी है। डिप्रेशन का सीधा मतलब यह है कि आपने जो उम्मीद, आशा या भरोसा किया था वह कहीं न कहीं टूट गया है। जो लोग डिप्रेशन की समस्या के शिकार होते हैं, वे लोगों के साथ घुलना-मिलना पसंद नहीं करते। वे अकेले रहना चाहते हैं। इससे उनमें नेगेटिविटी बढ़ती है। डिप्रेशन इतना घातक है कि अगर कोई नेगेटिव सोच को लगातार और बार-बार सोचता है और उसे फील करता है, तो उसका जीवन निराशा से भर सकता है। सुसाइड करने के विचार आने लगते हैं।

कैसे जाने कि मुझे डिप्रेशन है

1.डिप्रेशन एक मूड डिसऑर्डर है। अगर जीवन के प्रति निराशा बढ़ती जा रही है, तो समझिए कि आप डिप्रेशन की ओर बढ़ रहे है।

  1. खुद को नाकाबिल और दोषी मानना, आत्म विश्वास में कमी, अपने आप से घृणा करना, आगे की जिंदगी का रास्ता बंद दिखाई देना, ये कुछ ऐसी सोच है, जिससे व्यक्ति हमेशा घिरा रहता है।
  2. अगर किसी व्यक्ति में यह पहचानना है कि वह डिप्रेशन का शिकार है या नहीं, तो सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप उसके इंटरेस्ट को फॉलो करें। मतलब अगर वह पहले, स्पोर्ट्स खेलने, किताबे पढ़ने, दोस्तों के साथ बात करने में इनटरेस्ट दिखा रहा था और अब नहीं दिखा रहा तो समझिए कि मामला गड़बड़ है।
  3. इसका एक और लक्षण है कि इसमें सोने में समस्या आएगी। मतलब ज्यादा नकारात्मक बातों को सोचने से नींद के घंटे कम हो जाते हैं।
  4. व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। व्यक्ति शांत और बुझा-बुझा रहने लगता है या फिर गुस्सा और चिड़चिड़ापन का शिकार हो जाता है।

क्या है इसके कारण

डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण है हमारे सोचने का तरीका। हमने भौतिक चीजों से अपने आप को इतना घेर लिया है, कि असल जिंदगी क्या होती उसे ही भूल गए हैं। जिंदगी वो नहीं है कि आप हमेशा प्यार, पैसे और चीजों के पीछे भागते रहें। ये जरूरी तो है लेकिन यह जिंदगी नहीं है। इसलिए अपनी जिंदगी को इनपर डिपेंड मत कीजिए, बल्कि कुछ समय इनके बिना जीने की कोशिश कीजिए। क्योंकि जहां डिपेंडेंसी होगी वहां तनाव भी होगा और खोने का डर भी होगा। और जब ऐसा होता है तो व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार होने लगता है।

हर चीज की आदत होती है, अगर आपने गलत तरीके से सोचने की आदत बनाई हुई है, तो आपके काम भी गलत तरीके से होंगे। सही तरीका है कि, जो चीज सच्ची है उसे सच्चे रूप में लें और चीज सच्ची नहीं है उसे गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। इस दुनिया में सच क्या है और झूठ क्या है, यह जानने के लिए अपना कुछ समय इसमें इनवेस्ट करें।

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