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ज्वार के फ़ायदे

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हम अपने घरों में कई तरह की फसल का इस्तेमाल करते हैं उनमें से एक है ज्वार, जो कम वर्षा वाले क्षेत्र में बोई जाती हैं। यह अनाज और जानवरों के चारे के लिए होती है, ज्वार को हम जानवरों का पौष्टिक चारा भी बोल सकते हैं। ज्वार ठंडा होता है जिसके कारण हम इसे गर्मियों के दिनों में अधिक प्रयोग में लाते हैं और इससे हमारा शरीर स्वास्थ्य रहता है। ज्वार के दानों को भून कर भी खाया जाता है जोकि खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं। ज्वार दो किस्मों में पाया जाता है लाल और सफ़ेद। इसका स्वाद फ़ीका होता है। ज्वार में कई तरह के पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जो हमारे लिए बहुत ही लाभदायक होते हैं। लेकिन जो कमज़ोर लोग होते हैं उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए क्योकि यह वात पैदा करता है ।

ज्वार के फ़ायदे
हम जानते हैं कि ज्वार कम वर्षा वाले क्षेत्र में बोई जाती है। इसमें कई तरह के पौष्टिक तत्व होते है साथ ही यह ठंडी होती है यह हमारे लिए बहुत ही फायदेमंद होती है। इसका प्रयोग हम कई तरह के रोंगों को ठीक करने के लिए भी करते हैं। जैसे कि :-

दांत का रोग
जब भी दांत में दर्द हो तब हमे ज्वार के दानों को भूनकर उस की राख का मंजन बना कर दातों में लगाने से दांत का दर्द ठीक हो जाता है इसके साथ इससे दांत मजबूत होते हैं और मसूड़ों में सूजन खत्म होती है ।

जोड़ों में वायु दर्द
जिन लोगों को लकवा या जोड़ों में दर्द हो उनके लिए ज्वार काफ़ी फायदेमंद होती है। इसके लिए ज्वार को उबाल के उस का रस निकाल ले फिर उसमे रेंडी का तेल समान मात्रा में मिला ले, उसके बाद इसे गर्म करके उस जगह पर रूई के साथ इसका प्रयोग करे। कुछ दिनों में आप ठीक हो जाओगे।

पेट में जलन
जब भी हम कुछ बाहर का खा लेते हैं तो हमारे पेट में जलन होने लगती है जलन को दूर करने के लिए ज्वार को भून कर बताशो के साथ खाएं। ऐसा करने से पेट की जलन दूर हो जाती है।

शरीर में जलन
शरीर की जलन दूर करने के लिए ज्वार के आटे का लेप अपने शरीर पर लगाये। ऐसा करने से आप को ठंडक मिलेगी ।

कील – मुंंहासे
अक्सर लोग को अपना चेहरा बहुत प्यारा लगता है, जब कभी भी उनके चेहरे पर कील – मुंहासे आ जाते हैं तो वो परेशान हो जाते हैं। ऐसे में उन्हें चाहिए कि वो ज्वार के कच्चे दानों को पीसकर उसमे थोडा कत्था व चूना मिलाकर अपने चेहरे पर लगायें। ऐसा करने से चेहरे से सारे कील मुंहासे निकल जाते हैं और आप का चेहरा चमकने लगता है।

खुजली
खुजली होने पर ज्वार के हरे पत्तों को पीस लें, उसमे रेंडी का तेल और बकरी की मीगन की राख़ को मिलाकर लगायें।

प्यास अधिक लगना
जब हमे प्यास अधिक लगती है तो ज्वार की रोटी को छाछ में भिगोकर खाएं। ऐसा करने से प्यास कम लगती है।

बवासीर
बवासीर में ज्वार की रोटी खाने से बबासीर में राहत मिलती है।

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